एलिसा परीक्षण, सिद्धांत, प्रोटोकॉल, विधियाँ & किट

एलिसा परीक्षण क्या है?

एलिसा (Enzyme-Linked Immunosorbent Assay) जैविक नमूनों/बायलॉजिकल सैंपलों में प्रोटीन, पेप्टाइड्स, हार्मोन या रसायनों के स्तर को मापने के लिए एक एंटीबॉडी आधारित तकनीक है। सैंडविच एलिसा परीक्षण में एक कैप्चर एंटीबॉडी 96 वेल की प्लेट की सतह पर स्थिर/इम्मोबिलाइज हो जाती है, इसके बाद एक सैंपल मिलाते हैं जिसमें रुचि का एनालायट (analyte of interest) होता है और एंटीबॉडी और सैंपल के बीच एक कॉम्प्लेक्स बन जाता है। इन्क्यूबेशन के बाद अनबाउंड एनालायट को हटाने के लिए वेल को वॉश बफर से धोया/वॉश किया जाता है। एंजाइम के साथ कंजूगेटेड/संयुग्मित डिटेक्शन एंटीबॉडी को मिलाने के बाद डिटेक्शन होता है। इन्क्यूबेशन के बाद अतिरिक्त एंटीबॉडी और अनस्पेसिफिक बाउंड प्रोटीन हटाने के लिए एक बार और वॉश किया जाता है। फिर सब्सट्रेट मिलाया जाता है और कलरीमेट्रिक परिवर्तन होता है। सैंपल में एनालायट की मात्रा रंग बदलने की बढ़ी हुई इंटेंसिटी से संबंधित है। अंत में स्टॉप सॉल्यूशन डाला जाता है। एक बार प्रोटोकॉल पूरा हो जाने पर, सैंपल का एलिसा प्लेट रीडर पर विश्लेषण किया जाता है और परिणामों को प्लाट और कैलकुलेट करने के लिए एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम का उपयोग किया जाता है।

Figure : Cartoon of 96 well polystyrene ELISA plate

एलिसा परख प्लेटें

एलिसा परिक्षण 96 या 384 वेल (well) वाली पॉलीस्टायरीन प्लेटों में किया जाता है। इन्क्यूबेशन के बाद प्रोटीन और एंटीबॉडी को 96 वेल वाली एलिसा प्लेट में स्थिर/इम्मोबिलाइज कर सकते हैं। सैंडविच एलिसा परीक्षण में कैप्चर एंटीबॉडी एलिसा प्लेट में स्थिर हो जाती है। हालांकि, एक प्रतिस्पर्धी (कंपिटीटिव) एलिसा परीक्षण में, रूचि का एनालायट एलिसा प्लेट पर बाउंड हो जाता है। फिर एलिसा परीक्षण के दौरान नॉन-स्पेसिफिक प्रोटीन की बाइंडिंग को रोकने के लिए बीएसए (BSA) ब्लॉकिंग घोल/सॉल्यूशन से एलिसा प्लेट को ब्लॉक किया जाता है।

प्लेटों में एंटीबॉडी या एनालायट की बाइंडिंग वॉश बफर से वॉश करने देती है और इस प्रकार नॉन-स्पेसिफिक एनालायट हट जाते हैं।

एलिसा प्लेट की तली सपाट होती हैं ताकि प्लेट रीडर 450nm पर एलिसा प्लेट रीडर में अवशोषकता/एब्जोर्बेंस को पढ़ सके।

ईआईए बनाम एलिसा

इम्मुनोअसे (immunoassay) एक परीक्षण है जो रूचि वाले एंटीजन को डिटेक्ट करने/पता लगाने के लिए एंटीबॉडी का उपयोग करता है। ElA (Enzyme Immunoassay) एक परीक्षण है जो डिटेक्शन और क्वांटिफिकेशन के लिए एंटीबॉडी पता करने के लिए डिटेक्ट की गई एंटीबॉडी से कंजुगेट एंजाइम का प्रयोग करता है। ElA के दो उदाहरण वेस्टर्न ब्लॉट (western blot) और एलिसा हैं। वेस्टर्न ब्लॉट एक EIA है जो प्रोटीन को स्थिर करने के लिए नाइट्रोसेल्यूलोस (Nitrocellulose) या पीवीडीएफ (PVDF) का उपयोग करता है। फिर इसमें रुचि की प्रोटीन से बाइंड करने के लिए एक प्राइमरी एंटीबॉडी मिलाते हैं, फिर एंजाइम कंजुगेटेड-सेकेंडरी एंटीबॉडी से रुचि के एनालायट का पता करने के लिए इंक्यूबेट करते हैं। एलिसा परीक्षण में, कैप्चर एंटीबॉडी को एक पोलीस्टाइरीन प्लेट पर स्थिर/इम्मोबिलाइज करके, इसके बाद रुचि के एनालायट वाले सैंपल को इन्क्यूबेट करने के बाद, फिर एक डिटेक्शन एंटीबॉडी का उपयोग करके और कलरीमेट्रिक परिवर्तन को TMB का सब्सट्रेट के रूप में उपयोग करके डिटेक्शन किया जाता है।

Figure : A Human IL-6 ELISA kit with a range of 4.69-300pg/ml and sensitivity of <2.813pg/ml

एलिसा परीक्षण की सेंसिटिविटी & रेंज

एलिसा परीक्षण शोधकर्ताओं को ज्ञात मानकों/स्टैंडर्ड के एक सेट का उपयोग करके परिभाषित रेंज के अंदर उनके सैंपल (सीरम, प्लाज्मा, सतह पर तैरनेवाला (supernatant), दूध, मूत्र) में एनालायट की मात्रा निर्धारित करने देता है। एलिसा परीक्षण करते समय एक ज्ञात सांद्रता/कंसंट्रेशन के एनालायट को सैंपल के अंदर एनालायट की मात्रा के लिए मानदंड/रेफरेंस के रूप में इस्तेमाल करते हैं जिसे स्टैंडर्ड कहते हैं। एलिसा परीक्षण के दौरान, स्टैंडर्ड का एक स्टॉक दिया होता है, जो आमतौर पर ng/mL या pg/mL मात्रा में होता है, फिर इस स्टॉक को 6-7 गुना पतला/डायल्यूट कर देते हैं, जो किसी वॉल्यूम में एक एनालायट की ज्ञात कंसंट्रेशन प्रदान करता है। प्लॉट करते समय एक स्टैण्डर्ड ग्राफ बनता है और सैंपलों/नमूनों की अज्ञात सांद्रता की गणना इन मूल्यों के विरुद्ध की जाती है।

हाई सेंसिटिविटी ह्यूमन एलिसा किट

एनालायट रेंज सेंसिटिविटी

1.87 pg/ml - 60 pg/ml

0.97 pg/ml

0.31 pg/ml - 10 pg/ml

0.31 pg/ml

1.56 pg/ml - 50 pg/ml

0.8 pg/ml

1.56 pg/ml - 50 pg/ml

1.30 pg/ml

0.78 pg/ml - 25 pg/ml

0.75 pg/ml

0.78 pg/ml - 25 pg/ml

0.69 pg/ml

एलिसा परीक्षण के प्रकार

एलिसा परीक्षण के 6 मुख्य प्रकार हैं जिन्हें शोधकर्ता अपने दिन-प्रतिदिन के अध्ययन में उपयोग करते हैं, सबसे आम सैंडविच और प्रतिस्पर्धी एलिसा परीक्षण हैं, जिसके बाद एलिस्पॉट और अप्रत्यक्ष/इनडायरेक्ट एलिसा परीक्षण आते हैं।

> सैंडविच एलिसा परीक्षण

सैंडविच एलिसा परीक्षण एलिसा का सबसे सामान्य रूप/फॉर्म है और इसका नाम डिटेक्शन के लिए एनालायट को सैंडविच की तरह कैप्चर और डिटेक्शन एंटीबॉडी द्वारा सैंडविच बनाने/घेर लेने पर पड़ा है। जैसा कि ऊपर बताया गया है, सैंडविच एलिसा परीक्षण में पॉलीस्टाइरीन एलिसा प्लेट पर स्थिर/इम्मोबिलाइज कैप्चर एंटीबॉडी होती हैं। फिर सैंपल को एलिसा प्लेट के वेल में इनक्यूबेट करते हैं, जिसके बाद उसे वॉश करते हैं। थोड़े और इन्क्यूबेशन के बाद एंजाइम लिंक्ड डिटेक्शन एंटीबॉडी डालते हैं और अंत में एनालायट का स्तर मापने के लिए सब्सट्रेट और स्टॉप सॉल्युशन मिलाते हैं।

सैंडविच एलिसा परीक्षण प्रोटोकॉल

> प्रतिस्पर्धी (कंपिटीटिव) एलिसा परीक्षण

प्रतिस्पर्धी एलिसा परीक्षण ज्यादातर हार्मोन का पता लगाने के लिए उपयोग किया जाता है। प्रतिस्पर्धी एलिसा परीक्षण में पॉलीस्टाइरीन एलिसा प्लेट पर रुचि के एनालायट को स्थिर/इम्मोबिलाइज करते हैं। प्रतिस्पर्धी एलिसा का नाम उस प्रक्रिया के नाम पर रखा गया है, जिसमें सैंपल का एनालाइट कैप्चर एंटीबॉडी के लिए प्लेट पर इम्मोबिलाइज एनालाइट के साथ प्रतिस्पर्धा करता है। इसलिए एक सैंपल में एनालाइट की बढ़ी मात्रा से सिग्नल में कमी आएगी और आपको सैंडविच एलिसा परीक्षण में दिखने वाले उस ग्राफ के विपरीत है।

> एलिस्पॉट (ELISpot) एलिसा परीक्षण

एलिस्पॉट परीक्षण का उपयोग आमतौर पर वैक्सीन बनाने, पशु चिकित्सा अनुसंधान, मोनोसाइट्स/मैक्रोफेज/डेंड्राइटिक कोशिकाओं के विशेषीकरण (characterization) के लिए किया जाता है। एलिस्पॉट परीक्षण का सिद्धांत सैंडविच एलिसा परीक्षण के समान है, जिसमे एक प्लेट को कैप्चर एंटीबॉडी से कोट (coated) किया जाता है। कोशिकाओं को एलिसा प्लेट में 3 घंटे तक इनक्यूबेट किया जाता है, जो कोशिकाओं पर निर्भर कर सकता है। कोशिकाओं द्वारा उत्पादित साइटोकाइन (Cytokines) तब एलिसा प्लेट पर स्थिर कैप्चर एंटीबॉडी के साथ बाइंड करते हैं। कोशिकाओं को वॉश किया जाता है और एक डिटेक्शन एंटीबॉडी मिलाई जाती है, फिर इसके बाद साइटोकाइन का पता लगाने/डिटेक्ट करने के लिए सब्सट्रेट और स्टॉप सॉल्यूशन मिलाया जाता है।

>फ्लोरोस्पॉट एलिसा परीक्षण

फ़्लोरोस्पॉट एलिसा परीक्षण एलिस्पॉट एलिसा के समान है, हालांकि, एंजाइम-लिंक्ड डिटेक्शन एंटीबॉडी का उपयोग करने के बजाय, डिटेक्शन और विश्लेषण/एनालाइसिस के लिए एक फ्लोरोफोर के साथ कंजुगेटेड डिटेक्शन एंटीबॉडी का इस्तेमाल करते हैं।

> इनडायरेक्ट एलिसा परीक्षण

इनडायरेक्ट एलिसा परीक्षण में रुचि का एनालायट प्राइमरी कैप्चर एंटीबॉडी के साथ बाइंड करता है। फिर प्राइमरी एंटीबॉडी के साथ बाइंड करने के लिए सेकंडरी एंटीबॉडी का इस्तेमाल करते हैं। यह वेस्टर्न ब्लॉट परीक्षण की विधि के समान है।

> डायरेक्ट एलिसा परीक्षण

डायरेक्ट एलिसा तकनीक एक परीक्षण है, जिससे एक एंजाइम-लेबल एंटीबॉडी का उपयोग सॉल्यूशन/घोल में उपस्थित एनालायट से बाइंड होने के लिए करते हैं। एक बार बाइंड होने पर, एंजाइम-लेबल एंटीबॉडी रंग बदलने के लिए सब्सट्रेट के साथ रियेक्ट कर सकती हैं, जो एनालायट की मात्रा पता करने देता है। यह सेकेंडरी डिटेक्शन एंटीबॉडी की जरूरत को हटाता है क्योंकि कैप्चर एंटीबॉडी दोनों काम करती है।

> मल्टीप्लेक्स एलिसा परीक्षण

मल्टीप्लेक्स एलिसा परीक्षण से शोधकर्ता एक सैंपल में कई एनालायट का विश्लेषण करते है। यह तब बहुत उपयोगी है जब शोधकर्ता एक साथ एक सैंपल में कई साइटोकाइन को माप रहे हों। मल्टीप्लेक्स एलिसा परीक्षण को कई तरीकों से कर सकते हैं, जिसमें फ्लो साइटोमेट्री, प्लेट आधारित मल्टीप्लेक्स या पीवीडीएफ या नाइट्रोसेल्यूलोज मेम्ब्रेन/झिल्ली का उपयोग करना शामिल है।

Multiplex ELISA Panels

> CLlA परीक्षण

सिद्धांत में CLlA परीक्षण सैंडविच परीक्षण के सिद्धांत समान हैं, हालांकि, सैंपल का डिटेक्शन करने के लिए एक क्रोमोजेनिक (chromogenic) सब्सट्रेट का उपयोग करने की बजाय, CLIA परीक्षण केमिलुमिनसेंट (chemiluminescent) पर आधारित हैं। CLIA परीक्षण में, डिटेक्शन एंटीबॉडी सब्सट्रेट को प्रकाश/लाइट में बदल देती हैं। निकलने वाले फोटोन (photon) की मात्रा सैंपल में एनालायट की मात्रा के अनुपात में होती है। परीक्षण में सैंपल की मात्रा को मापने के लिए ल्यूमिनोमीटर से चमक/ल्युमिनिसेंस को रिलेटिव लाइट यूनिट (RLU) में मापा जाता है।

CLlA परीक्षणों को अक्सर कम सांद्रता/कंसन्ट्रेशन (डिटेक्शन लिमिट= zeptomole 10-21 mol) वाले एनालायट को चेक/डिटेक्ट करने के लिए उपयोग किया जाता है।

> इन-सेल एलिसा (In-Cell ELISA)

इन-सेल एलिसा एक इनडायरेक्ट एलिसा तकनीक है और जिसे एक पॉलीस्टायरीन एलिसा प्लेट पर रात भर प्लेट की गई और कल्चर की गई कोशिकाओं का उपयोग करके किया जाता है। कोशिकाओं को तब फिक्स, परमियेब्लाइज और ब्लॉक करते हैं। टारगेट प्रोटीन को या तो एंजाइम कंजुगेटेड या फ्लोरोसेंटली टैग वाली (fluorescently tagged) प्राइमरी एंटीबॉडी का उपयोग करके डिटेक्ट किया जाता है। फ्लोरोसेंट टैग वाली एंटीबॉडी को या तो फ्लोरोसेंट प्लेट रीडर या माइक्रोस्कोप द्वारा डिटेक्ट किया जाता है, जबकि एंजाइम कंजुगेटेड/संयुग्मित सैंकेंडरी एंटीबॉडी प्लेट रीडर द्वारा डिटेक्ट हो पाएगी।

एलिसा (ELISA) के लिए डिटेक्शन रणनीतियाँ

एलिसा में डिटेक्शन स्टेप/कदम आपके सैंपल में एनालायट की मात्रा का पता करने के लिए अंतिम चरण है। डिटेक्शन स्टेप के दौरान उत्पन्न सिग्नल एनालायट की मात्रा के अनुपात में होते हैं। एलिसा से एनालायट का पता लगाने के लिए तीन विकल्प; रेडियोएक्टिव (Radioimmunoassay) या फ्लोरोसेंट टैग या क्रोमोजेनिक सब्सट्रेट का उपयोग करना हैं।

क्रोमोजेनिक एलिसा डिटेक्शन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सबसे लोकप्रिय और सबसे व्यापक तकनीक है और इसमें हॉर्स रेडिश पेरोक्सीडेज (HRP) सब्सट्रेट TMB (3, 3’, 5, 5’-tetramethylbenzidine) होता है, जो ऑक्सीडाइज/ऑक्सीकृत होने पर नीला रंग देता है और सल्फ्यूरिक एसिड डालने पर पीला हो जाता है। इससे सैंपल को एलिसा प्लेट रीडर पर 450nm पर पढ़ सकते हैं।

डिटेक्शन के दूसरे तरीके जैसे कि केमिल्युमिनसेंस का उपयोग एचआरपी (HRP) के आधार पर सब्सट्रेट के रूप में ल्यूमिनॉल (luminol) का उपयोग करके कर सकते हैं जो 425 nm पर लाइट एमिट/उत्पन्न करता है।

रेडी टू यूज प्री-कोटेड एलिसा किट और डेवलपमेंट एंटीबॉडी पेअर एलिसा किट

ELlSA Genie पर हम साइटोकाइन, कीमोंकाइन, हार्मोन, सिग्नेलिंग प्रोटीन और हजारों दूसरे बायोमार्कर को डिटेक्ट करने के लिए कई सारी रेडी टू यूज प्री-कोटेड एलिसा (ELlSA) किट और एलिसा डेवलपमेंट किट प्रदान करते हैं।

एलिसा जिनी एलिसा किट

ELISA Genie ELISA kits में प्री-कोटेड एलिसा (ELlSA) प्लेट, कैप्चर और डिटेक्शन एंटीबॉडी, वॉश बफर, स्टैण्डर्ड डाइल्यूशन बफर, टीएमबी (TMB), स्टॉप सॉल्युशन होते हैं। हम कई प्रजातियों/स्पीशीज (species) की रेंज के लिए किट ऑफर करते हैं जिसमें मनुष्य, माउस, रैट, पोर्सीन, बोवाइन और कई अन्य शामिल हैं।

हाई सेंसिटिविटी PharmaGenie एलिसा किट

ELISA Genie में PharmaGenie ELISA किट हाई क्वालिटी एलिसा किट हैं, जिन्हें फार्मा और बायोटेक रिसर्च की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ISO 9001:2000 क्वालिटी सिस्टम से प्रमाणित हाई क्वालिटी मोनोक्लोनल एंटीबाडी पेअर और रिएजेंट पर फोकस करते हुए, PharmaGenie ELISA किट आपके भविष्य को खोजने के लिए अच्छे परीक्षण हैं।

  • सटीकता और विश्वसनीयता की गारंटी है क्योंकि हमारे सभी रिएजेंट (reagent) ISO 9001:2000 क्वालिटी सिस्टम से प्रमाणित हैं
  • प्राकृतिक और रिकॉम्बिनेंट दोनों एंटीजन स्पेसिफिसिटी पहचानता है
  • अन्य साइटोकाइन के साथ क्रॉस रिएक्टिविटी नहीं होती है
  • NIBSC का स्टैंडर्ड मापांकन/कैलिब्रेशन
  • डवलपमेंट एलिसा किट (एंटीबॉडी पेअर)
  • एंटीबॉडी पेअर रिसर्च करने देते हैं

डवलपमेंट एलिसा किट (antibody pairs)

शोधकर्ता डवलपमेंट एलिसा किट से अपनी खुद की एलिसा प्लेट बना सकते हैं। डवलपमेंट एलिसा किट एंटीबॉडी के जोड़े (कैप्चर & डिटेक्शन एंटीबॉडी) और बफर के साथ आती है। इससे शोधकर्ता अपनी एलिस किट को कोट (coat) और प्लेट (plate) कर सकते हैं। ELISA Genie बहुत सारी हाई क्वालिटी डवलपमेंट एलिसा किट देती है जिन्हें सुपरसेट एलिसा किट कहा जाता है।

  • अत्यधिक अनुकूलित/ऑप्टिमाइज मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जोड़ी।
  • अच्छा स्टैंडर्ड ग्राफ बनाने के लिए हाई क्वालिटी प्यूरिफाइड रिकॉम्बिनेंट प्रोटीन।
  • रीएजेंट की ISO 9001:2000 क्वालिटी सिस्टम से पुष्टि की गई है।
  • प्राकृतिक और रिकॉम्बिनेंट एंटीजन स्पेसिफिसिटी।
  • अन्य साइटोकाइन के साथ क्रॉस रिएक्टिविटी नहीं होती है।
  • NIBSC का स्टैंडर्ड मापांकन/कैलिब्रेशन।
  • एलिसा किट को फार्मास्यूटिकल और बायो टेक सेक्टर को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।
  • बढ़िय रिसर्च के लिए विभिन्न साइज की किट!

प्रमुख सुपरसेट एलिसा विकास किट

सुपरसेट डेवलपमेंट एलिसा प्रोटोकॉल

Figure: Overview of the protocol steps for a SuperSet Development ELISA protocol using antibody pairs.

डवलपमेंट एलिसा किट और प्री-कोटेड एलिसा किट के फायदे और विशेषताएँ

विशेषताएँ डेवलपमेंट एलिसा किट प्री-कोटेड एलिसा किट मल्टीप्लेक्स एलिसा

Read out

HRP-TMB

HRP-TMB

PE/APC

इन्क्यूबेशन समय

2-3 घंटे

2-3 घंटे

2-3 घंटे

सेंसिटिविटी

pg/ml

pg/ml

pg/ml

प्रति वेल टारगेट की संख्या

1

1

24

जरूरी उपकरण

एलिसा प्लेट रीडर

एलिसा प्लेट रीडर

फ्लो साईटोमीटर

एलिसा के लिए एंटीबॉडी के प्रकार

डिटेक्शन और कैप्चर एंटीबॉडी वाली एलिसा किट मोनोक्लोनल या पॉलीक्लोनल एंटीबॉडी का इस्तेमाल करके बनाई जाती हैं। मोनोक्लोनल सिंगल एपिटोप को पहचानती हैं, इसलिए पर्टिकुलर एंटीजन का सटीक/एक्यूरेट विश्लेषण करने देती हैं। हालाँकि, पॉलीक्लोनल में ज्यादा मात्रा में एंटीजन पकड़ने की क्षमता होती है। अब एलिसा किट बनाने के लिए रिकॉम्बिनेंट मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का उपयोग करते हैं, जो स्पेसिफिसिटी और कंसिस्टेंसी/निरंतरता को बढ़ा देता है।

एलिसा किट की ELISA Genie PharmaGenie रेंज प्रमुख साइटोकाइन टारगेटों IL-1 beta, IFN-gamma, IL-2, IL-4, IL-6, CXCL8/IL-8 और कई अन्य के लिए हाई क्वालिटी मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का उपयोग करके बनाई जाती हैं।

बफ़र्स को अवरुद्ध करना

> ब्लॉकिंग बफर ऑप्टिमाइजेशन/अनुकूलन

एलिसा प्लेट में प्रोटीन की नॉन-स्पेसिफिक बाइंडिंग को रोकने के लिए, प्लेट को कोट करने के लिए ब्लॉकिंग बफर का उपयोग किया जाता है। एलिसा (ELISA) प्लेट की बाइंडिंग क्षमता प्लेट में कोट की गई प्रोटीन की मात्रा (कैप्चर एंटीबॉडी/एंटीजन) से ज्यादा होती है। इसलिए इन्क्यूबेशन चरणों के दौरान एंटीबॉडी या अन्य प्रोटीन की नॉन-स्पेसिफिक बाइंडिंग को रोकने के लिए बचे एरिया को ब्लाक कर देना चाहिए। इसलिए ब्लॉकिंग बफर का इस्तेमाल करने के लिए प्रोटीन का इस्तेमाल करते हैं जो अन्य प्रोटीन या डिटेक्शन एंटीबॉडी के साथ बाइंड या काम्प्लेक्स नहीं बनाती है। इसलिए, ब्लॉकिंग बफर एलिसा की सेंसिटिविटी बढ़ा देता है क्योंकि वह नॉन-स्पेसिफिक प्रोटीन की बाइंडिंग रोक कर बैकग्राउंड नॉइस घटा देता है और इसलिए सिग्नल से नॉइस का अनुपात बढ़ा देता है।

एलिसा डवलपमेंट के समय परीक्षण को ऑप्टिमाइज़ करने और सिग्नल से नॉइस अनुपात को बेहतर करने के लिए कई विभिन्न ब्लॉकिंग बफर टेस्ट किये जाने चाहिए। प्रोटीन:प्रोटीन इंटरेक्शन का होना प्रोटीन की नॉन-स्पेसिफिक बाइंडिंग को प्रभावित करने वाला फैक्टर हो सकता है। ब्लॉक बफर को ऑप्टिमाइज करने पर, सिग्नल से नॉइस के अनुपात को बढ़ाना मुख्य होता है, यह कंट्रोल वेल को टारगेट ऐनालाइट वाले सैम्पल को डाले बिना उपयोग करके होता है।

ब्लॉकिंग बफर ऑप्टिमाइज़ करते समय यह आवश्यक है कि ज्यादा कंसंट्रेशन वाले ब्लॉकर का इस्तेमाल न करें, जो एंटीबॉडी-एंटीजन इंटरेक्शन में बाधा या एंजाइम एक्टिविटी को रोक सकता है, जिससे सिग्नल से नॉइस का अनुपात कम हो जाता है। ब्लॉकिंग के लिए ऑप्टिमाइज़ करते समय, बेस्ट सिग्नल को ऑप्टिमाइज़ करने के लिए कुछ बफर को टेस्ट किया जा सकता है।

> कोटिंग बफर

एलिसा कोटिंग बफर का उपयोग प्रोटीन/एनालायट या एंटीबॉडी को माइक्रोटाइटर (microtitre) प्लेट पर इम्मोबिलाइज/स्थिर करने के लिए होता है। माइक्रोटाइटर (microtitre) प्लेट पर एनालायट/एंटीबॉडी को इम्मोबिलाइज/स्थिर करने के लिए कोटिंग बफर का pH प्रमुख घटक हो सकता है। pH 7.4 और pH 9.6 के बीच का कोटिंग बफर चुनने पर बाइंड होने वाले प्रोटीन/एंटीबॉडी/एनालायट के स्टेरिक (steric) स्ट्रक्चर पर असर पड़ सकता है और इसलिए उनके इम्मोबिलाइजेसन/स्थिरीकरण को प्रभावित करता है। कोटिंग बफर को टेस्ट करने से मोबिलिटी (mobility) और इम्मोबिलाइजड एंटीबॉडी की परफॉर्मेंस बढ़ाने में मदद् मिल सकती है। सुपरसेट डवलपमेंट एलिसा किट में एक प्लेट के लिए 10ml कोटिंग बफर में 100µl कैप्चर एंटीबॉडी डालें।

ब्लॉकिंग बफर की रेसिपी

फॉस्फेट बफर सेलाइन (PBS)

1% BSA

कोटिंग बफर रेसिपी (1L) संघटक की मात्रा

Na₂CO₂

1.5g

NaHCO₃

2.93g

डिस्टिल्ड वाटर

1L (pH 9.6)

एलिसा वॉश चरण

इन्क्यूबेशन चरण के बाद, नॉन-स्पेसिफिक प्रोटीन और रिएजेंट हटाकर बैकग्राउंड सिग्नल कम करने के लिए वॉशिंग चरण की जरूरत होती है। हर किट को स्पेसिफिक मात्रा में वॉश चरण की जरूरत होती है। वॉश करते समय, कम संख्या में वॉशिंग करने से हाई बैकग्राउंड आता है, हालाँकि, इसके विपरीत ज्यादा वॉशिंग एंटीबॉडी और/या एंटीजन को एलिसा प्लेट से हटा सकती है और इसलिए सेंसिटिविटी और सिग्नल घटा देती है। मैन्युअली वॉश चरण करने की तुलना में प्लेट वॉशर से ऑटोमेटेड वॉशिंग करना ज्यादा अच्छा होगा।

TBS (ट्रिस-बफर सेलाइन) या PBS (फॉस्फेट-बफर सेलाइन) का इस्तेमाल करके वॉश चरणों को पूरा किया जाता है। इसके साथ नॉन-स्पेसिफिक बाउंड प्रोटीन हटाने के लिए 0.5% ट्वीन- 20 (tween-20) मिला सकते हैं।

एलिसा डेटा का विश्लेषण करना

आपके एलिसा प्रोटोकॉल के पूरा हो जाने के बाद अगला कदम एलिसा प्लेट रीडर का इस्तेमाल कर डेटा को प्राप्त करना और उसका विश्लेषण करना है।

एलिसा करते समय आपके परिणाम के स्टेटिस्टिकल सिग्नीफिकेन्स को सुनिश्चित करने के लिए सैंपल को दो या तीन प्रतियों/जगह (duplicate or triplicate) चलाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, पॉजिटिव कंट्रोल जैसे कि स्टैंडर्ड, ज्ञात पॉजिटिव कंट्रोल और नेगेटिव कंट्रोल जैसे कि ब्लेंक/खाली या बिना एंटीजन वाले सैंपल की जरूरत पड़ सकती है।

  • नेगेटिव कंट्रोल: बिना एनालायट वाला सैंपल
  • पॉजिटिव कंट्रोल: एनालायट की ज्ञात उपस्थिति या क्वांटिटी वाला सैंपल

इस्तेमाल की गई एलिसा के प्रकार (क्वालिटेटिव, सेमी-क्वांटिटेटिव या क्वांटिटेटिव) के अनुसार आउटपुट डेटा अलग हो सकता है। इसलिए आप जिस डेटा का विश्लेषण करना चाहते हैं उसके आधार पर इस्तेमाल करने के लिए स्पेसिफिक एलिसा चुनें। डेटा को ऑप्टिकल डेंसिटी (OD) बनाम सैंपल के लॉग कंसंट्रेशन के ग्राफ के रूप में दिखाते हैं। ज्ञात कंसंट्रेशन वाले स्टैंडर्ड का उपयोग स्टैंडर्ड ग्राफ बनाने के लिए होता है जिससे अज्ञात एनालायट का कंसंट्रेशन पता कर सकते हैं।

विभिन्नता का गुणांक (Coefficient of variation)

विभिन्नता का गुणांक परिणाम में किसी भी तरह की असंगतियों (inconsistencies) और गलतियों (inaccuracies) को पहचानने में मदद् करता है। यह औसत से अंतर के प्रतिशत में व्यक्त होता है। अंतर जितना ज्यादा होगा असंगति और गलती उतनी ज्यादा होगी। विभिन्नता का गुणांक (CV) मानक विचलन/स्टैंडर्ड डेविएशन σ से औसत µ का अनुपात है:

Cv= σ/µ

  • एक उच्च CV निम्न कुछ कारणों की वजह से हो सकता है:
  • पिपेटिंग (Pipetting) में गलतियाँ
  • सैंपल में बैक्टीरिया/कवक या दूसरे रीएजेंट से दूषित होना
  • तापमान परिवर्तन- परिवर्तन से बचाने के लिए प्लेट को स्थिर तापमान पर इन्क्युबेट किया जाना चाहिए
  • वेल का सूखना – सभी इन्क्यूबेशन चरणों के दौरान प्लेट कवर होनी चाहिए